नाना पाटेकर का जीवन परिचय
नाना पाटेकर (Nana Patekar) भारतीय सिनेमा के एक ऐसे दिग्गज अभिनेता हैं, जिन्होंने अपनी दमदार आवाज, अनूठी संवाद अदायगी (डायलॉग डिलीवरी), और बेजोड़ अभिनय से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया है। फिल्मों में उनके निभाए गए गंभीर, विद्रोही और संजीदा किरदारों ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं की श्रेणी में ला खड़ा किया है। अभिनय के अलावा, वह अपनी सादगी और समाज सेवा के लिए भी देश भर में जाने जाते हैं।

1. व्यक्तिगत जानकारी और प्रारंभिक जीवन
- पूरा नाम: विश्वनाथ पाटेकर (Vishwanath Patekar)
- प्रसिद्ध नाम: नाना पाटेकर
- जन्म तिथि: 1 जनवरी 1951
- जन्म स्थान: मुरूड़-जंजीरा, रायगढ़ जिला, महाराष्ट्र, भारत
- माता-पिता: संजनाबाई पाटेकर (माता) और दिनकर पाटेकर (पिता)
- वैवाहिक स्थिति: विवाहित (पत्नी: नीलकंठी पाटेकर)
नाना पाटेकर का शुरुआती जीवन बेहद कठिनाइयों और संघर्षों से भरा हुआ था। जब वह बहुत छोटे थे, तब उनके परिवार को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने मुंबई की सड़कों पर सिनेमा के पोस्टर पेंट करने और उन्हें थिएटर्स तक पहुँचाने का काम किया, जिसके बदले उन्हें बेहद कम मेहनताना मिलता था। इन तमाम संघर्षों के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और मुंबई के प्रसिद्ध सर जे. जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से कमर्शियल आर्ट्स में डिप्लोमा प्राप्त किया।
2. अभिनय करियर की शुरुआत और सफलता
थिएटर से सफर की शुरुआत
नाना पाटेकर का अभिनय के प्रति झुकाव कॉलेज के दिनों से ही था। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत मराठी रंगमंच (थिएटर) से की। नाटकों में उनके सशक्त अभिनय ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिसके चलते उन्हें फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे।
फिल्मी करियर के मुख्य पड़ाव
- शुरुआती फिल्में: नाना ने वर्ष 1978 में रिलीज हुई फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार निभाए।
- सफलता का मोड़: वर्ष 1987 में आई फिल्म ‘अंकुश’ उनके करियर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में उनके विद्रोही तेवर और अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
- पहला राष्ट्रीय पुरस्कार: वर्ष 1989 में निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘परिंदा’ में उन्होंने कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन ‘अन्ना सेठ’ का नकारात्मक किरदार निभाया। इस शानदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
3. 90 का दशक: स्वर्णिम काल
1990 का दशक नाना पाटेकर के करियर का सबसे बेहतरीन दौर रहा। इस दौरान उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट और क्लासिक फिल्में दीं:
- तिरंगा (1992): अभिनेता राजकुमार के साथ उनकी जोड़ी और फिल्म के दमदार डायलॉग आज भी दर्शकों की जुबान पर हैं।
- क्रांतिवीर (1994): इस फिल्म में निभाया गया ‘प्रताप तिलक’ का किरदार उनके करियर के सबसे आइकॉनिक रोल्स में से एक है। समाज और राजनीति पर तीखा प्रहार करने वाले इस किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- खामोशी: द म्यूजिकल (1996): संजय लीला भंसाली की इस फिल्म में उन्होंने एक मूक-बधिर पिता की भूमिका निभाई। बिना एक भी शब्द बोले, केवल आँखों और भावों के जरिए भावनाओं को व्यक्त करने की उनकी कला ने सबको हैरान कर दिया।
- अग्निसाक्षी (1996) और यशवंत (1997): इन फिल्मों में भी उनके अभिनय के अलग-अलग रूप देखने को मिले।
4. विविधतापूर्ण भूमिकाएँ और कॉमेडी
नाना पाटेकर ने खुद को केवल गंभीर या गुस्से वाले किरदारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समय के साथ उन्होंने कॉमेडी और चरित्र प्रधान भूमिकाओं में भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया:
- वेलकम (2007) और वेलकम बैक (2015): इन फिल्मों में उनके द्वारा निभाया गया ‘उदय शेट्टी’ (उदय भाई) का किरदार बेहद लोकप्रिय हुआ। उनके कॉमिक टाइमिग और संवादों ने लोगों को पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर दिया।
- राजनीति (2010): प्रकाश झा की इस राजनीतिक ड्रामा फिल्म में उन्होंने एक चतुर और समझदार राजनेता की भूमिका निभाई।
- नटसम्राट (2016): यह उनकी सबसे महान मराठी फिल्मों में गिनी जाती है। इसमें एक बुजुर्ग और सेवानिवृत्त थिएटर अभिनेता के जीवन के दर्द और अकेलेपन को उन्होंने जिस जीवंतता के साथ पर्दे पर उतारा, उसने देखने वालों की आँखें नम कर दीं।
5. व्यक्तिगत जीवन और सादगी
परदे पर खूंखार या आक्रामक दिखने वाले नाना पाटेकर असल जिंदगी में बेहद शांत, जमीन से जुड़े और दयालु स्वभाव के इंसान हैं। बॉलीवुड में बड़ी सफलता और बेशुमार शोहरत हासिल करने के बावजूद उन्होंने कभी चकाचौंध या स्टारडम को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। वह लंबे समय तक अपनी माँ के साथ मुंबई के एक साधारण फ्लैट में रहे। उन्हें महंगे कपड़ों, गाड़ियों या पार्टियों का कोई शौक नहीं है। खाली समय में वह खेती करना और सादगी भरा जीवन बिताना पसंद करते हैं।
6. सामाजिक कार्य और ‘नाम फाउंडेशन’
नाना पाटेकर सिर्फ पर्दे के हीरो नहीं हैं, बल्कि असल जिंदगी में भी एक बड़े समाज सुधारक और मददगार के रूप में जाने जाते हैं।
महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में जब किसानों की आत्महत्या की खबरें आने लगीं, तो वह चुप नहीं बैठ सके। उन्होंने अपनी कमाई से सीधे तौर पर पीड़ित किसान परिवारों की मदद करना शुरू किया। इसके बाद, वर्ष 2015 में उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ (NAAM Foundation) की स्थापना की।
इस फाउंडेशन के माध्यम से:
- सूखाग्रस्त और संकटग्रस्त किसानों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाती है।
- गाँवों में जल संरक्षण के लिए तालाब, नहरें और चेक डैम का निर्माण किया जाता है।
- ग्रामीण महिलाओं और परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार के साधन मुहैया कराए जाते हैं।
7. प्रमुख पुरस्कार और सम्मान
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार:
- सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता – परिंदा (1989)
- सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – क्रांतिवीर (1994)
- सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता – अग्निसाक्षी (1996)
- पद्म श्री (2013): भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान और कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया।
- फिल्मफेयर पुरस्कार: अभिनय के विभिन्न श्रेणियों (सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, खलनायक और सहायक अभिनेता) में उन्हें कई बार फिल्मफेयर पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
निष्कर्ष
नाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं जिन्होंने अपनी कला से समझौता किए बिना सिनेमा जगत में अपनी एक अलग और अमिट छाप छोड़ी है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि आपके इरादे पक्के हैं और दिल में इंसानियत है, तो आप सफलता की ऊंचाइयों को छूने के साथ-साथ समाज के लिए भी एक मिसाल बन सकते हैं।

Welcome To VKSUINFO
हैलो दोस्तों
आपका स्वागत है हमारे Website (VKSUINFO.COM) पर। आपको इस Website के माध्यम से B.A/B.sc/B.com की तैयारी तथा परीक्षा के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। अगर आप प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो आपका स्वागत है हमारे Website पर। आप हमारे Website पर निःशुल्क तैयारी कर सकते हैं ।
धन्यवाद
Ranjeet Kumar Pathak
( B.Sc Physics V.K.S. University )